रात का रहस्य हिंदी कहानी | The Mystery of the Night (Hindi Story)

No Comments

 

रात का रहस्य



शहर की चकाचौंध भरी रात में, मुंबई के एक आलीशान अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स 'स्टारलाइट टावर्स' में हलचल मच गई। रवि मेहता, एक अमीर बिजनेसमैन, अपनी लाइब्रेरी में मृत पाए गए। उनका गला दबा हुआ था, और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस को सूचना मिली तो इंस्पेक्टर विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे। समय था आधी रात का।

रवि की पत्नी नेहा सबसे पहले चीख मचाई। "रवि! रवि! कौन कर सकता है ऐसा?" वह रोते हुए बोली। नेहा एक खूबसूरत अभिनेत्री थी, जो रवि से शादी के बाद फिल्मों से दूर हो गई थी। लेकिन शादी में दरारें साफ दिख रही थीं। पड़ोसियों ने बताया कि दोनों अक्सर झगड़ते थे। नेहा ने कहा, "मैं रसोई में थी। जब लौटी तो दरवाजा बंद था।"

इंस्पेक्टर विक्रम ने कमरा जांचा। लाइब्रेरी में एक पुरानी डेस्क, किताबों की अलमारियां और एक सेफ था। सेफ खुला था, लेकिन अंदर कुछ नहीं मिला। रवि का मोबाइल टेबल पर था, लास्ट कॉल नेहा का ही आया था। कमरे में कोई संघर्ष के निशान नहीं। खिड़की बंद, लेकिन बालकनी का दरवाजा थोड़ा खुला था। बाहर बारिश हो रही थी, फर्श गीला था। कोई फिंगरप्रिंट नहीं।

पहला संदिग्ध: नेहा। मोटिव? रवि ने उसे फिल्मों में वापस जाने से रोका था। बीमा पॉलिसी में नेहा लाभार्थी थी। लेकिन अलीबाई? दरवाजा अंदर से बंद कैसे?

दूसरा संदिग्ध: रवि का भाई अजय। वह अपार्टमेंट में ही रहता था। अजय एक नाकाम बिजनेसमैन था, जिसे रवि ने कई बार मदद की, लेकिन हाल ही में रवि ने पैसों की कटौती कर दी। अजय ने कहा, "मैं अपने कमरे में सो रहा था। रवि ने कल झगड़ा किया था, लेकिन हत्या? मैं ऐसा नहीं कर सकता।"

तीसरा संदिग्ध: नौकरानी कमला। वह 10 साल से परिवार के साथ थी। कमला ने बताया, "साहब ने मुझे शाम को साफ-सफाई के लिए बुलाया। उसके बाद मैं किचन में चली गई।" लेकिन पुलिस को पता चला कि कमला का बेटा जुआरी था, और रवि ने उसे नौकरी देने से मना कर दिया था। मोटिव साफ।

चौथा संदिग्ध: पड़ोसी राजेश वर्मा। एक रिटायर्ड वकील, जो रवि से जमीन विवाद में उलझा था। राजेश ने कहा, "मैं बालकनी पर सिगार पी रहा था। बारिश में कुछ दिखा ही नहीं।" लेकिन उसकी बालकनी रवि की से सटी थी।

इंस्पेक्टर विक्रम ने सबको इकट्ठा किया। "यह एक लॉक्ड रूम मिस्ट्री है। हत्यारा कौन? कैसे?"

सुबह हुई। फॉरेंसिक टीम ने रिपोर्ट दी: मौत गला दबाने से। कोई जहर नहीं। हथियार? रवि का खुद का दुपट्टा, जो नेहा का था। नेहा चौंक गई। "मेरा दुपट्टा? मैंने तो कल पहना ही नहीं!"

विक्रम ने अजय से पूछा। "तुम्हारी आखिरी बातचीत क्या थी?" अजय बोला, "रवि ने कहा था कि सेफ में वसीयत है। वह मुझे कुछ नहीं छोड़ेगा। नेहा और उसके बच्चे सबकुछ पाएंगे।"

नेहा के बच्चे? नेहा गर्भवती थी। रवि खुश नहीं था। "बच्चा मेरा नहीं," उसने कहा था।

कमला ने चाय सर्व की। विक्रम ने नोटिस किया कि चाय में चीनी ज्यादा थी। रवि डायबिटीज का मरीज था। लेकिन मौत गला दबाने से हुई।

राजेश ने कहा, "रवि ने मुझे धमकी दी थी। जमीन का केस हारने पर।"



विक्रम ने सेफ चेक किया। अंदर एक लिफाफा मिला: वसीयत। रवि ने सबकुछ नेहा को दिया था। अजय को कुछ नहीं। कमला को छोटा सा फ्लैट। राजेश को कुछ नहीं।

रात हुई। विक्रम ने सबको दोबारा बुलाया। "सच सामने आ गया। हत्यारा नेहा नहीं, क्योंकि वह गर्भवती है और फोर्स से गला नहीं दबा सकती। अजय नहीं, उसके हाथ पर कोई निशान नहीं। कमला नहीं, उसकी उम्र 60 की। राजेश?"

राजेश हंसा। "मैं?"

"नहीं," विक्रम बोला। "हत्यारा कोई बाहरी नहीं। देखिए फर्श का गीला निशान। बारिश का पानी बालकनी से आया। लेकिन कोई पैरों के निशान नहीं। मतलब नंगे पैर?"

सब सन्न। नेहा बोली, "मैं नंगे पैर ही घूमती हूं घर में।"

"लेकिन दरवाजा अंदर से बंद?" विक्रम ने कहा। "ट्रिक ये है। हत्यारा कमरे में घुसा, रवि को मारा, दुपट्टे से गला दबाया। फिर बालकनी से बाहर निकला। लेकिन कैसे दरवाजा बंद?"

विक्रम ने किताबों की अलमारियां देखीं। एक किताब नीचे गिरी हुई। "मैचस्टिक ट्रिक!" उसने किताब उठाई। अंदर एक माचिस की तीलि बंधी धागे से। "हत्यारा ने धागा लटकाया, दरवाजे की कुंडी खींची, और धागा खींच लिया। बालकनी से!"

लेकिन कौन?

फॉरेंसिक ने मोबाइल चेक किया। लास्ट कॉल के बाद एक मैसेज: "मैं आ रही हूं।" नेहा का नंबर। लेकिन नेहा ने कहा वह रसोई में थी।

विक्रम ने नेहा का फोन चेक किया। मैसेज ड्राफ्ट में था, भेजा नहीं गया। "फेक कॉल! कोई नेहा का फोन यूज किया।"

अचानक कमला रो पड़ी। "मैंने देखा था... अजय साहब रवि के कमरे की ओर जाते।"

अजय गुस्से में। "झूठ!"

विक्रम ने CCTV चेक किया। अपार्टमेंट का गेट बंद था। कोई बाहरी नहीं आया।

"सुनो," विक्रम बोला। "रवि डायबिटीज का था। चाय में चीनी? कमला, तुम्हें पता था। लेकिन मौत चाय से नहीं। डायवर्शन!"

सब चुप। विक्रम ने सेफ का लिफाफा खोला। अंदर नोट: "अगर मुझे कुछ हो, नेहा निर्दोष। असली हत्यारा वह है जो मेरी दवा चुराएगा।"

दवा? रवि की इंसुलिन। टेबल पर इंसुलिन की शीशी खाली। ओवरडोज? नहीं, मौत गला दबाने से। लेकिन शायद रवि बेहोश हो गया इंसुलिन से, फिर गला दबाया।

फॉरेंसिक: इंसुलिन ओवरडोज से कोमा, फिर दबाया।

कौन चुरा सकता? डॉक्टर? नहीं। घर में ही।

नेहा रोई। "रवि की दवा मैं ही रखती थी।"

ट्रिक खुली। विक्रम ने बालकनी चेक की। नीचे गार्डन। कोई गिरा नहीं। लेकिन एक रस्सी का टुकड़ा!

"क्लाइंबिंग! हत्यारा बालकनी से चढ़ा। लेकिन कौन इतना फुर्तीला?"

अजय जिम जाता था। मोटिव, मौका, साधन।

अजय हंसा। "प्रूफ?"

विक्रम ने अजय की शर्ट चेक की। जेब में धागा! और बालकनी पर उसके चप्पल के निशान।

"तुम बालकनी से चढ़े, नेहा का फोन लिया, कॉल किया खुद को, रवि को बुलाया। इंसुलिन मिलाई चाय में, वह बेहोश हुआ। दुपट्टा से मारा। सेफ खोला, लेकिन कुछ नहीं मिला। धागा से दरवाजा बंद किया, वापस चढ़े।"

अजय टूट गया। "हां... रवि ने मुझे बर्बाद कर दिया। पैसा, वसीयत सब नेहा को। मैंने बदला लिया।"

पुलिस ने अजय को गिरफ्तार किया। नेहा ने राहत की सांस ली। "धन्यवाद इंस्पेक्टर।"

विक्रम मुस्कुराए। "रहस्य सुलझ गया। लेकिन एक ट्विस्ट बाकी। सेफ में असली वसीयत? वह तो नकली थी। रवि ने मुझे भेजी थी। असली में अजय को आधा साम्राज्य मिलना था। लेकिन अब जेल में।"

back to top